सर्वेक्षण के प्रकार [Types of Surveying!

सर्वेक्षण के प्रकार
[Types of Surveying!
सर्वेक्षण को वर्गीकृत करने का सबसे प्रमुख आधार क्षेत्र
होता है। क्षेत्र के आधार पर सर्वेक्षण के दो सामान्य वर्ग होते हैं
1, भू-गणितीय अथवा त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण
(Gcodctic or Trigonometric Survey),
2. समतल सर्वेक्षण (Plane Survey)।
1. भू-गणितीय अथवा त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण (Geoletic
or Trigonometric Survey)-जब किसी विस्तृत भू-प्रदेश का
एक-साथ सर्वेक्षण करके उसका मानचित्र बनाना होता है तो उसमें
पृथ्वी की गोलाई (Curvature) का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता
है। सर्वेक्षण की ऐसी विधि जिसमें पृथ्वी की वक्रता को ध्यान में
रखा जाए, भू-गणितीय सर्वेक्षण कहलाती है। सपाट तल के सन्दर्भ
में किसी विन्दु से भू-पृष्ठकी वक्रता 182 कि०मी०पर 1 मीटर होती
है। दूरी बढ़ने के साथ-साथ यह वक्रता भी बढ़ती जाती है। अतः
भू-गणितीय सर्वेक्षण अति परिशुद्ध यन्त्रों की सहायता से किया
जाता है। राष्ट्रीय एवं सामरिक महत्त्व का होने के कारण भारत में
इस प्रकार का सर्वेक्षण सर्वे ऑफ इण्डिया द्वारा किया जाता है।
2. समतल सर्वेक्षण (Plane Survey)-किसी छोटे
भू-भाग पर किया जाने वाला ऐसा सर्वेक्षण जिसमें पृथ्वी की
वक्रता को ध्यान में नहीं रखा जाता, समतल सर्वेक्षण कहलाता
है। जब सर्वेक्षण किया जाने वाला क्षेत्र 200 वर्ग कि०मी० से
कम होता है तो उसमें पृथ्वी तल की वक्रता इतनी कम होती है।
कि उसे अंकित करने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। समतल
सर्वेक्षण में किन्ही दो बिन्दुओं (स्थानों) के बीच की रेखा को
सरल रेखा (Straight Line) मान लिया जाता है। महाविद्यालयों
और विश्वविद्यालयों के भूगोल विभागों में प्रायः समतल सर्वेक्षण
ही करवाया जाता है। समतल सर्वेक्षण को आगे अनेक आधारों
पर वर्गीकृत किया जाता है।
1. उद्देश्य के आधार पर (On the Basis of Purpose),
2. उपकरणों के आधार पर (On the Basis of
Instruments),
3. सर्वेक्षण की विधि के आधार पर (On the Basis
of Method of Survey)
1. उद्देश्य के आधार पर सर्वेक्षण के प्रकार (Types of
Survey on the Basis of Purpose)-उद्देश्य के आधार पर
समतल सर्वेक्षण के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं--
(i)स्थलाकृतिक सर्वेक्षण* (Topographical Survey)-
यह सर्वेक्षण तब किया जाता है जब बड़े क्षेत्रों के मानचित्र बनाने
हों। इन मानचित्रों में विभिन्न भौगोलिक तत्त्वों; जैसे बस्ती, सड़क,
विस्तृत किन्तु सूक्ष्म विवरण प्रस्तुत किया जाता है।
रेलमार्ग, नहर, नदी, पर्वत, मैदान, पठार, वृक्ष व झीलों इत्यादि का
(ii) भौगोलिक सर्वेक्षण (Geographical Survey)-
यद्यपि यह सर्वेक्षण स्थलाकृतिक सर्वेक्षण जैसा ही होता है। इस
सर्वेक्षण के आधार पर बने मानचित्रों में भी प्राकृतिक एवं
सांस्कृतिक तत्त्वों को दर्शाया जाता है। अन्तर केवल इतना है।
कि स्थलाकृतिक सर्वेक्षण में शुद्धता और पृथ्वी की वक्रता का
बहुत ध्यान रखा जाता है, जबकि भौगोलिक सर्वेक्षण में इन
तथ्यों की ओर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता।
इस प्रकार का सर्वेक्षण भू-पृष्ठ का निर्माण करने वाली चट्टानों
(iii) भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey)-
की संरचना, स्थिति एवं गुणों इत्यादि का अध्ययन करने के
लिए किया जाता है।

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