अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख दोष Main Disadvantages of International Trade]

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख दोष
Main Disadvantages of International
Trade]

जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इतने लाभ हैं वहां पर इसके
कुछ दोष भी है। उनका संक्षिप्त विवरण अग्रलिखित है
(1) स्वास्थ्य व जन-कल्याण के साथ खिलवाड़-वैश्विक
व्यापार पर्यावरण, कल्याण व लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ
जीवन के अन्य अनेक पक्षों को प्रभावित करता है। लोग कई
प्रकार की हानिकारक वस्तुओं के सेवन के अभ्यस्त हो जाते हैं।
और पूरा सामाजिक ढाँचा ही बिगड़ जाता है। उदाहरणतया
19वीं शताब्दी में चीन के लोगों को मदिरा तथा अफीम जैसे
मादक पदार्थों के सेवन करने की आदत पड़ गई क्योंकि ये
पदार्थ अंतरर्राष्ट्रिीय व्यापार के माध्यम से फ्रांस तथा अफ्रीकी
देशों से आसानी से मिल जाते थे। विदेशी व्यापार के कारण
भारत में कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने उत्पादन शुरू कर दिया है,
जिससे भारतीय लोगों में कोका कोला तथा अन्य वस्तुओं का
सेवन बढ़ गया है।
(ii) प्राथमिक वस्तु उत्पादक राष्ट्रों के लिए हानिकारक
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार विशिष्टीकरण को बढ़ावा देता है जिसके
कारण विकास में असन्तुलन पैदा हो जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय
विशिष्टीकरण विकसित देशों के लिए तो सही है किंतु विकासशील
कि विदेशी प्रतिस्पर्धा की स्थिति में प्राथमिक उत्पादक देश सदा
तथा पिछड़े देशों के लिए हानिकारक है। इसका आशय यह है
ऐसे ही रह जाएँगे और कभी भी औद्योगिक राष्ट्रों के रूप में
उभर नहीं पाएँगे।
। (iii) युद्ध की स्थिति में हानिकारक-युद्ध छिड़ जाने की
स्थिति में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
के कारण प्रभावित देशों को आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम
जिससे वस्तुओं के आयात तथा निर्यात में बाधा पड़ती है। युद्ध
करनी पड़ती है जिसके कारण उनके उत्पादन अन्तर्राष्ट्रीय
मण्डियों तक नहीं पहुँच पाते। प्रथम तथा द्वितीय विश्वयुद्धों में
युद्ध के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव सारे संसार में
महसूस किए गए थे।
(iv) स्थानीय उद्योगों के लिए हानिकारक-अंतरराष्ट्रीय
व्यापार के कारण कई देशों के स्थानीय उद्योगों पर अत्यंत
प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विकसित देशों में निर्मित वस्तुएं सस्ती
तथा उच्च कोटि की होती हैं। ये वस्तुएं विकासशील तथा पिछड़े
देशों के बाज़ार में आकर स्थानीय उत्पादों की मांग समाप्त कर
देती है। भारत में स्वतंत्रता-प्राप्ति से पहले लगभग सभी
निर्मित वस्तुएं इंग्लैंड से आती थी। जिस कारण भारत में
उद्योग-धन्धे नहीं पनप पाए, बल्कि पहले से विकसित हथकरघा
उद्योग भी इंग्लैंड से आयातित वस्त्रों के सामने दम तोड़ गया।
(v) भावी हितों का त्याग-स्वतंत्रता अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
के कारण वर्तमान लाभ के लिए भावी हितों का त्याग करना
पड़ता है। पिछड़े हुए तथा विकासशील देश अपने कच्चे माल
का औद्योगिक देशों को निर्यात कर देते हैं। इससे भविष्य के
लिए संकट पैदा हो जाता है। इसका कारण यह है कि जब इन
देशों में स्थानीय उद्योगों के विकास का समय आता है तो

प्राकृतिक संसाधन पहले ही समाप्त हो जाते हैं।

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