आंतरिक जलमार्ग (Internal Waterways)

2. आंतरिक जलमार्ग (Internal Waterways)-
जिन नौका-वहन योग्य नदियों, झीलों, नहरों, नावों तथा स्टीमरों
एवं तटीय क्षेत्रों का प्रयोग सामान व सवारियों के परिवहन के
लिए किया जाता है, उन्हें आंतरिक जलमार्ग कहते हैं। ये
जलमार्ग प्रायः स्थल से घिरे होते हैं। प्राचीन काल में भारत जैसे
देशों में तो नदियों का प्रयोग परिवहन के महामार्ग के रूप में
किया जाता था, परन्तु वर्तमान में रेलमार्गों तथा अन्य सुविधाजनक
साधनों के साथ प्रतिद्वंद्विता के कारण तथा सिंचाई इत्यादि
कार्यों में जल के उपयोग से जल की पर्याप्त मात्रा के
सुलभ नहो पाने एवं खराब रख-रखाव के कारण नदी मार्गों से होने वाला
जल-परिवहन अपना महत्व खो चुका है।
आंतरिक जलमार्गों के विकास को प्रभावित करने वाली
दशा–(i) नदियाँ सततवाही अथवा बारहमासी होनी चाहिए
ताकि परिवहन व्यवस्था साल भर सुचारू रूप से चल सके।
इनमें जलमार्गों की चौड़ाई तथा जल की मात्रा भी महत्त्वपूर्ण हैं।
(ii) नदियों के मार्ग में चट्टान, महाखड्ड अथवा प्राप्त नहीं
होने चाहिए ताकि नौका या स्टीमर निर्बाध चलाया जा सके।
(iii) सीधे जलमार्ग सुविधाजनक होते हैं। अतः नदियों
में विसर्प (Meanders) या मोड़ न्यूनतम होने चाहिए।।
(iv) शीतकाल में नदियों का जल ठण्ड से जमने न पाए
ताकि यातायात रुके नहीं।
(v) नदियों के मुहाने तलछट, कीचड़ व गाद इत्यादि से
मुक्त होने चाहिए ताकि आंतरिक यातायात को समुद्री यातायात
से जोड़ा जा सके।
(vi) मौसम के अनुसार नदी में जल की मात्रा घटने-बढ़ने
पर भी परिवहन में कठिनाई आती है।
आंतरिक जलमार्गों के दोष-(i) आंतरिक जलमार्गों में
सामान के परिवहन की गति अत्यंत धीमी होती है जिस कारण
सावरिया और व्यापारी इसमें रुचि नहीं लेते।
(ii) मांग क्षेत्रों से दूर बहने वाली नौका-योग्य नदियों से
परिवहन का विशेष लाभ नहीं उठाया जा सकता।
। (iii) नदियों को सदैव यातायात योग्य बनाए रखने के
लिए उनकी तली से तलछट (Sediments) निकालते रहने पड़ते
हैं। रख-रखाव के इस खर्च में परिवहन की लागत बढ़ती है।
(iv) नदियों में बाढ़ आने या शुष्क मौसम में जल के कम
प्रवाह के कारण जल परिवहन में बाधा आती है।
(v)कम पूंजी, बेड़े का वैज्ञानिक रखरखाव, जर्जर सामग्री,
अति बोझ (Overloading) तथा प्रायः शिक्षित मल्लाहों के कारण
आंतरिक जलमार्गों पर आए दिन दुर्घटनाएं घटती रहती है।
इन सबके बावजूद आज सभी विकसित देश मान रहे हैं।
की घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय परिवहन तथा व्यापार के क्षेत्र में नदी ।
भागों की सार्थकता (Significance) आज भी बरकरार है।
आंतरिक जलमार्गों के गुण-(i) जलमार्ग परिवहन के
अन्य साधनों की अपेक्षा सबसे सस्ते व सुगम साधन होते हैं।
कम मूल्य वाली, भारी व अधिक स्थान घेरने वाली वस्तुओं; जैसे
कोयला, अयस्क, लकड़ी, कृषि उपज इत्यादि के परिवहन के
लिए आंतरिक जलमार्ग उपयुक्त होते हैं।
(ii) जलमार्ग बनाने नहीं पड़ते तथा न ही उनके रख-रखाव
का कोई खर्च आता है। इसके विपरीत रेलों व सड़कों के
निर्माण में करोड़ों रुपए की राशि खर्च होती है।
(iii) घने वनों में नदियाँ ही परिवहन का एकमात्र साधन
होती है।

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