अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण पक्ष । [Important Aspects of International

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण पक्ष ।
[Important Aspects of International
Trade) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रतिरूप (Pattern) को निर्धारित
करने वाले महत्वपूर्ण तीन पक्ष होते हैं
(1) व्यापार का परिमाण, (2) व्यापार का संयोजन,
(3) व्यापार की दिशा।
1. व्यापार का परिमाण-व्यापार की गई वस्तुओं के
वास्तविक तौल (Tonnage) को व्यापार का परिमाण (Volume
of Trade) कहा जाता है। हालांकि तौल से मूल्य का सही-सही
ज्ञान कभी नहीं हो पाता और न ही व्यापारिक सेवाओं को तौल
2. व्यापार का संयोजन-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में जगह
पाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार भी बदलते रहते हैं।
20वीं शताब्दी के आरम्भ में आयात और निर्यात की वस्तुओं में
प्राथमिक उत्पादों की प्रधानता थी। बाद में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
में विनिर्मित वस्तुओं ने प्रमुखता प्राप्त कर ली। वर्तमान समय
में यद्यपि विश्व व्यापार के अधिकांश भाग पर विनिर्माण सेक्टर
का आधिपत्य है, सेवा क्षेत्र जिसमें परिवहन तथा अन्य व्यावसायिक
सेवाएं शामिल हैं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि की प्रवृत्ति दिखा
रहा है। विगत कुछ वर्षों से व्यापार में पेट्रोलियम का स्थान
महत्त्वपूर्ण बना हुआ है। कुल विश्व व्यापार में विभिन्न वस्तु
समूहों का अंश  में देखा जा सकता है।
वस्तु समूह विश्व व्यापार के एक
बड़े भाग की संरचना करते हैं। यहाँ यह जानना जरूरी है कि
सेवा सेक्टर का व्यापार विनिर्माण सेक्टर तथा प्राथमिक उत्पादों
के व्यापार से एकदम अलग है। उदाहरणतः
(ई) सेवाओं का तो अपरिमित (Infinitive) विस्तार किया।
जा सकता है, मगर वस्तुओं का नहीं।
(ई) सेवाओं का उपयोग अनेक लोग करते हैं।
(iii) सेवाएँ अमूर्त और भारहीन होती हैं और एक बार
उत्पादित किये जाने पर उनका बार-बार दोहराए (Replication)
किया जा सकता है।
इस प्रकार वस्तुओं के उत्पादन की अपेक्षा सेवाओं का
उत्पादन ज्यादा लाभदायक होता है।
सेवाओं की आपूर्ति चार विभिन्न तरीकों से की जा सकती
है। तालिका 9.2 में विभिन्न प्रकार की सेवाओं व अंतर्राष्ट्रीय
बाजार में उन सेवाओं का प्रतिशत अंश दर्शाया गया है।

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