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Wednesday, 13 June 2018

आर्थिक भूगोल का महत्व [Importance of Economic Geography)

आर्थिक भूगोल का महत्व
(Importance of Economic Geography)



आर्थिक भूगोल को एक गत्यात्मक विषय माना जाता है
जिस कारण इसका महत्त्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके
अध्ययन से संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए मानव की क्षमता
बढ़ती है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए तो इसका महत्त्व
और भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके अध्ययन से विकास की
संभावनाओं वाले क्षेत्रों को आसानी से पता लगाया जा सकता
है। विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक भूगोल का महत्व इस प्रकार है

1. कृषि क्षेत्र-एक किसान को आर्थिक भूगोल के ज्ञान से
यह ज्ञात हो जाता है कि विभिन्न भागों में किस-किस प्रकार की
मिट्टी पाई जाती है? कौन-सी फसल के लिए किस प्रकार की मिट्टी ।
व धरातल उपयुक्त होते हैं भिन्न-भिन्न फसलों के लिए किस
प्रकार की जलवायु अनुकूल होती है? किस प्रकार की जमीन में
किस प्रकार की खाद दी जानी चाहिए देश को किन वस्तुओं की ।
अत्यधिक आवश्यकता है देश में किन व्यापारिक वस्तुओं की
मॉग अधिक है और देश उनसे कैसे अधिक लाभ उठा सकता
है देश में कृषि सम्बन्धी शोध कहाँ-कहाँ किए जाते ।

2. उद्योग क्षेत्र-एक उद्योगपति को आर्थिक भूगोल के ज्ञान
से इस बात का ज्ञान हो जाता है कि उसके उद्योग के लिए सस्ते दामों
। पर कच्चा माल किस क्षेत्र से मिल सकता है। प्रस्तावित उद्योग के
लिए सस्ते तथा कुशल श्रम, शक्ति के साधन, परिवहन तथा बाजा
की सुलभता है या नहीं अतः उद्योगपति के लिए आर्थिक भूगोल
का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है।

3. मज़दूरों के लिए महत्त्व-आर्थिक भूगोल के ज्ञान से
श्रमिकों को इस बात का ज्ञान हो जाता है कि किस प्रदेश में कृषि,
खनन तथा उद्योग के क्षेत्र में श्रम की आवश्यकता है। श्रमिक
अपनी योग्यता के अनुकूल श्रम का चुनाव करके अपनी आजीविका
कमाने में समर्थ होते हैं। दिल्ली तथा इसके उपनगरों में उद्योगों ।
का काफी विकास हुआ है। अतः देश के लगभग हर कोने से यहाँ
पर औद्योगिक श्रमिक एकत्रित हो गए हैं। पंजाब भारत का बहुत
ही उन्नत राज्य है और यहाँ पर भी अत्यधिक संख्या में श्रमिक
देश के विभिन्न भागों से आकर कृषि तथा उद्योग में श्रम प्रदान
करते हैं।

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