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Thursday, 14 June 2018

मत्स्य संसाधनों का संरक्षण [Conservation of Fisheries]

मत्स्य संसाधनों का संरक्षण
[Conservation of Fisheries]


मछली न केवल भोजन का बल्कि प्रोटीन का भी महत्त्वपूर्ण
स्रोत है। विश्व में लगभग 10 करोड़ टन मछली प्रतिवर्ष पकड़े
जाती है। यह उत्पादन संसार के कुल मांस उत्पादन से अधिक
है। मनुष्य को पशुओं से प्राप्त होने वाले कुल प्रोटीन का 25
प्रतिशत भाग अकेली मछली से प्राप्त होता है। विश्व में बढ़त
हुई जनसंख्या के भरण-पोषण और सीमित खाद्य-संसाधनों
दृष्टिगत मत्स्य संसाधनों का संरक्षण बहुत जरूरी है।

(1) मत्स्य संसाधनों के अन्धाधुन्ध दोहन पर रोक लगनी
चाहिए क्योंकि इन संसाधनों को सबसे अधिक हानि अति-मत्स्य
(Over-Fishing) से हुई है।

 (2) अपरिपक्व और छोटी मछलियों के पकड़ने पर प्रतिबन्ध
होना चाहिए। जालों (Net) के छेद एक विशेष माप से छोटे नहीं
होनी चाहिए।
होने चाहिए ताकि अप्रौढ़ मछलियाँ उसमें से निकल जाएँ।

(3) मछलियों के प्रजनन की कृत्रिम व्यवस्था भी

(4) मत्स्य क्षेत्रों तथा ज्वारनदमुखों (Estuaries) को
औद्योगिक मलबे और रासायनिक प्रदूषण से मुक्त रखा जाए
ताकि मछलियों का संवर्धन और संरक्षण हो सके। अधिकांश
मछलियाँ ज्वारनदमुखों पर अण्डे देती हैं।
होना चाहिए।

(5) निर्धारित मात्रा से अधिक मछली पकड़ने पर प्रतिबन्ध

(6) मछलियों की लुप्त हो रही प्रजातियों के विकास एट
प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

(7) ग्राम स्तर पर मछली पालन का प्रशिक्षण एवं उस
व्यवसाय को चलाने के लिए आर्थिक अनुदान एवं सहायिकी
(Subsidy) का भी प्रावधान होना चाहिए।
भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के
तत्वावधान में मत्स्य संवर्धन के लिए अनेक शोध कार्य किए गए हैं।

 मछली न केवल भोजन का बल्कि प्रोटीन का भी महत्त्वपूर्ण
स्रोत है। विश्व में लगभग 10 करोड़ टन मछली प्रतिवर्ष पकड़े
जाती है। यह उत्पादन संसार के कुल मांस उत्पादन से अधिक
है। मनुष्य को पशुओं से प्राप्त होने वाले कुल प्रोटीन का 25
प्रतिशत भाग अकेली मछली से प्राप्त होता है। विश्व में बढ़त
हुई जनसंख्या के भरण-पोषण और सीमित खाद्य-संसाधनों
दृष्टिगत मत्स्य संसाधनों का संरक्षण बहुत जरूरी है।

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