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Tuesday, 12 June 2018

आर्थिक भूगोल की शाखाएँ [Branches of Economic Geography]

आर्थिक भूगोल की शाखाएं

[Branches of Economic Geography] 



वर्तमान में आर्थिक भूगोल की अनेक शाखाओं का विकास
हो चुका है, जैसे—संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल, औद्योगिक भूगोल,
परिवहन भूगोल तथा वाणिज्य भूगोल आदि। सुविधा की दृष्टि से
आर्थिक भूगोल की तीन शाखाएँ मानी गई हैं। वस्तु
1. कृषि भूगोल (Agricultural Geography)-आर्थिक
भूगोल की इस शाखा के अन्तर्गत कृषि सम्बन्धी उन सभी भौगोलिक
दशाओं का अध्ययन किया जाता है जो कृषि-कार्य को प्रभावित जाता।
करती हैं। एक किसान के लिए जरूरी है कि उसे अपने खेत में
सूर्यताप (तापमान), मिट्टी का उपजाऊपन, जल की मात्रा, भूमि
उपजाई जाने वाली वस्तुओं की उपज सम्बन्धी अवस्थाओं, जैसे यथा
की ढाल तथा फसलों को बोने एवं काटने का समय, इत्यादि का जाता
ज्ञान अवश्य होना चाहिए। ये सभी सूचनाएँ किसान को कृषि-भूगोल
के अध्ययन से प्राप्त हो सकती हैं।
2. औद्योगिक भूगोल (Industrial Geography)—सभी
प्रकार के उद्योग-धन्धे कच्चे माल के लिए वन, कृषि एवं खनिज क्रिय
सम्पदा पर निर्भर करते हैं। अतः औद्योगिक भूगोल वन, कृषि एवं
खनन क्रियाओं से सीधा सम्बन्ध रखता है। इस प्रकार शक्ति के
साधन, कुशल एवं सस्ता श्रम, सस्ता एवं सुलभ परिवहन तथा
माँग के क्षेत्र भी किसी प्रदेश के औद्योगिक विकास को प्रभावित
अन्तर्गत किया जाता है। औद्योगिक दृष्टि से उन्नत देशों में।
करते हैं। इन सभी समस्याओं का अध्ययन औद्योगिक भूगोल के
औद्योगिक भूगोल का विशेष महत्त्व है। क्षेत्र
3. वाणिज्य भूगोल (Commercial Geography)-
। आर्थिक भूगोल की इस शाखा के अन्तर्गत किसी देश के व्यापार,
परिवहन, सन्देशवाहन, व्यापारिक केन्द्रों तथा बन्दरगाहों के विकास
के कारणों का अध्ययन किया जाता है। वास्तव में वाणिज्य भूगोल
का कोई अपना अस्तित्व नहीं है क्योंकि किसी भी देश अथवा क्षेत्र
का व्यापार वहाँ के कृषि पदार्थों, खनिज उत्पादनों, शक्ति के साधनों
तथा वस्तु-निर्माण उद्योगों पर निर्भर करता है। अतः वाणिज्य भूगोल
का विकास कृषि भूगोल तथा औद्योगिक भूगोल द्वारा ही होता है।

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