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Wednesday, 13 June 2018

वन संसाधनों के लाभ [Benefits of Forest Resources]

वन संसाधनों के लाभ
[Benefits of Forest Resources]


वन मनुष्य के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूप से उपयोगी होते हैं।
प्रत्यक्ष लाभ-वनों से प्रत्यक्ष लाभ निम्नलिखित है:-

1. ईंधन के लिए लकड़ी-घरेलू और औद्योगिक कार्यों में
ईंधन के लिए लकड़ी वनों से प्राप्त होती रही है। वर्तमान में
कोयला, पेट्रोलियम और विद्युत के अतिरिक्त ईंधन के कई गैर
परम्परागत विकल्प उपलब्ध हैं, तो भी लकड़ी महत्त्वपूर्ण ईंधन है।

2. इमारती लकड़ी-इमारतों व कारखानों के निर्माण,
कृषि औजार तथा फर्नीचर बनाने के लिए लकड़ी का महत्त्वपूर्ण
स्थान है।

3. भोजन-आज भी अनेक आदिम जातियाँ कन्द-मूल,
फूल और पशु-पक्षियों के आखेट के रूप में अपने भोजन के
लिए वनों पर आश्रित हैं।

4. औद्योगिक कच्चा माल–वनों से हमें अनेक प्रकार के
गौण उत्पाद प्राप्त होते हैं; जैसे गोंद, रेजिन, चिकिल, जंगली
रबड़, छाल, कॉर्क, लाख, कत्था, व तेंदूपत्ता इत्यादि। इन
उत्पादों पर कागज़, दियासलाई, प्लाईवुड, लाख, खेलों व सजावट
का सामान तथा रेशम आदि हमारे अनेक उद्योग आधारित हैं।

5. जड़ी-बूटियां-वनों से प्राप्त दातुन, चन्दन, आंवला,
बेलगिरी, संजीवनी, कचनार तथा असंख्य जड़ी-बूटियों से
साध्य-असाध्य रोगों का उपचार करने के लिए औषधियां बनती।
हैं। सौन्दर्य प्रसाधनों और सुगन्धियों के लिए कच्चा माल भी
वनों से प्राप्त होता है।

6. कृत्रिम रेशा-आजकल वनों की लकड़ी से कृत्रिम
रेशा बनाया जाने लगा है। इस प्रकार वस्त्र निर्माण उद्योग में भी ।
वन-संसाधनों का महत्व बढ़ेगा।

7. आश्रय स्थल-वन असंख्य जीव-जन्तुओं का आश्रय
स्थल होते हैं। वनों में उगी घास पशुओं के चारे के काम आती
है। कई पशु पेड़-पौधों के पत्तों को खाकर गुजारा करते हैं।

8. रोज़गार-वन सभी लोगों को आजीविका प्रदान करते हैं।
प्रत्यक्ष लाभ-वनों से अनेक अप्रत्यक्ष लाभ भी होते हैं।
जो हमें दिखाई नहीं देते।

अप्रत्यक्ष लाभ-वनों से अनेक अप्रत्यक्ष लाभ भी होते हैं।
जो हमें दिखाई नहीं देते

1. जलवायु पर प्रभाव-वन भूमिगत जल का पत्तियों के
द्वारा वाष्पीकरण करके तापमान को मृदु बनाते हैं तथा वायुमण्डल
में आर्द्रता की मात्रा बढ़ाकर वर्षा होने की दशाओं में योगदान देते हैं।

2. मृदा अपरदन की रोकथाम–एक आवरण के रूप में वन
वर्षा के आघात का प्रभाव कम करने मृदा-अपरदन को रोकते हैं।
तथा एक प्राकृतिक सम्पदा के प्रहरी का काम करते हैं।

3. मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाना-भूमि पर गिरे हुए पत्ते
और वनस्पति के अंश गल-सड़ कर मिट्टी में जीवांश (ह्यूमस
मिट्टी) की मात्रा को बढ़ाकर मिट्टी के उपजाऊपन को बढ़ाते हैं।

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